Rheumatism एक प्रकार का जोड़ों का संक्रमण हैं जिसमे आम
बोलचाल में आर्थराइटिस कहा जाता है | यह संन्य तौर पर जोड़ों में होने वाली सामान्य
विकृति है जो उम्र बढ़ने के साथ उत्पन्न होने लगती है, जोड़ों का दर्द और संक्रमण
सामन्यतः कुछ दिनों तक रहता है फिर लगभग सामान्य जैसा हो जाता है, परन्तु ऐसा बार
बार होते रहता है, दर्द उभरने का कारन अलग अलग व्यक्तियों में भिन्न भिन्न हो सकता
है जो मौसम, कार्य की प्रकृति, जीवनशैली, भोजन आदि पर निर्भर करता है |
होमियोपैथी:
एलोपैथिक पेनकिलर कुछ हद तक तो आराम देते हैं, परन्तु यह दीर्घकालीन अथवा स्थायी
नहीं होता है , वही लम्बे समय तक दवाइयां लेते रहने के कारन लीवर एवं किडनी में
दुष्प्रभाव होने कि संभावना होती है, ज्यदातर लोग अब इस विषय को समझने लगे हैं एवं
वैकल्पिक उपचार कि ओर आर्कर्षित हो रहे हैं| दुष्प्रभाव रहित, स्थायी उपचार देने
में सक्षम होमियोपैथी फ़िलहाल सर्वश्रेष्ट विकल्प होगा | ज्यदातर लोग सभी प्रकार के इलाज आजमाने के बाद ही होमियोपैथी में आते हैं, ऐसे
में उनका रोग काफी हद तक बढ़ चूका होता है, कई दवाइयां लेने के कारन शरीर की क्रिया
में भी परिवर्तन आ चूका होता है, इसलिए ऐसी स्थिति में धैर्य के साथ चिकित्सा करना
जरुरी हो जाता है, यदि किसी रोग के आरम्भ से ही होमियोपैथी लिया जाये तो रोग गंभीर
अवस्था में नहीं पहुचता है एवं उपचार शीघ्र हो सकता है |
इस लेख में जोड़ों के
दर्द से सम्बंधित दवाओं का वर्ना किया जा रहा है, जो कि पुर्णतः ज्ञानवर्धन के लिए
है ताकि आम लोग भी होमियोपैथी के प्रति अपनी जिज्ञासा शांत कर सकें, बेहतर उपचार
के लिए अपने होमियोपैथी चिकित्सक कि सलाह अवश्य लें |
प्रत्येक मरीज के
लक्षण अपने आप में भिन्न होते हैं, सभी फैक्टर, मौसम परिवर्तन, भोजन आदि अलग अलग
लोंगों को विभिन्न प्रकार से प्रभावित करते हैं, इसी आधार पर ही होमियोपैथिक दवाओं
का चुनाव किया जाता है |
रसटाक्स एक प्रमुख औषधि है जो जोड़ों के दर्द में
आत्य्धिक उपयोग की जाती है, यह ऐसे मरीज के लिए लाभदायक है जिसकी तकलीफ देर तक
बैठे रहने से बढ़ जाती है, एवं उठने में आत्य्धिक तकलीफ होती है, किन्तु थोड़ी दूर
चलने के बाद कुछ् आराम महसूस होने लगता है,, गीला होने, भीग जाने एवं बादल वाले
मौसम में मरीज का दर्द बढ़ जाता है | मुख्यतः जकडन एवं घाव जैसा दर्द जोड़ों में
महसूस होता है जो चलते फिरते रहने से कम रहता है | यह निचले हिस्सों के दर्द में
ज्यादा फायदेमंद है, हालाँकि यह सभी हिस्सों वाले जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों के
दर्द, पुराने चोट के दर्द में फायदेमंद हैं |
ब्रायोनिया औषधि में जरा भी हिलने डुलने अथवा चलने से दर्द
बढ़ जाता है, कई बार मरीज बिलकुल स्थिर बैठा रहता है; हिलने से भी परहेज करता है
ताकि उसका दर्द ना बढ़ जाये (रसटाक्स में इसके विपरीत लक्षण है)| इसका दर्द
मुख्यतः मांसपेशियों में रहता है, जोड़ वाला हिस्सा गर्म, लाल एवं सुजन लिए हुए
होता है, छूने एवं दबाने से भी दर्द बढ़ जाता है | ब्रायोनिया, लेडमपाल,
कल्चिकम, नक्स वोम औषधि में भी चलने से दर्द बढ़ जाता है, इन औषधियों को
इनके अन्य लक्षणों के आधार पर भी चुना जाता है |
पल्सेटिला औषधि में दर्द की जगह बार बार बदलते रहती है, विभिन्न जोड़ों में अलग अलग समय में दर्द देता रहता है, गर्मी और शाम के समय दर्द का बढ़ जाना एवं ठण्ड से दर्द का कम हो जाना इसका प्रमुख लक्षण है, लेडम दवा में भी ठण्ड से दर्द कम हो जाने का लक्षण है | पल्सेटिला का रोगी दर्द कि वजह से शांत नहीं बैठ पाता है, दर्द के कारन वह इधर उधर टहलने के लिए मजबूर हो जाता है, धीरे धीरे चलते रहने से उसे आराम मिलता है |
काल्मिया औषधि में भी
पल्सेटिला की तरह ही दर्द होता है किन्तु इसका दर्द सीने एवं शारीर के उपरी हिस्से
में ज्यादा रहता है, ह्रदय रोग से सम्बंधित Rheumatic दर्द होने पर यह ज्यादा
फायदेमंद है |
Rhododendron में जरा भी मौसम में परिवर्तन होता है दर्द शुरू हो जाता है या बढ़ जाता है,
काफी हद तक यह रसटाक्स के सामान है; आराम करने से दर्द बढ़ता है, किन्तु इसमें
ज्यादातर छोटे जोड़ों में दर्द ज्यदा पाया जाता है | हाथ के जोड़ों और उँगलियों के
जोड़ों के दर्द में कोलोफायलम आत्यधिक फायदेमंद है |



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